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हैलो रीडर्स, मेरा नाम रोहित है और मैं गुड़गांव में रहता हूँ। मेरी उम्र 23 साल है। दिखने में लोग मुझे ‘सास बहु’ का ‘करण वीरानी’ कहते हैं। काॅलेज में कई लड़कियां मरती थी मुझ पर। अब सीधे सीधे कहानी पर आता हूँ। हुआ यूं कि काॅलेज में एक लड़की
पर मैं बहुत मरा करता था। बहुत प्यार करता था उससे। हालांकि उसके लिये मेरे दिल में कोई भी बुरे ख्याल नहीं थे। लेकिन एक दिन जब उसका एक डांस कम्पीटीषन में कोई प्राइज़ नहीं आया तो वो बहुत निराष होकर रो रही थी और मैं उसके साथ ही था। रोडवेज़ की बस में आ रहे थे सोहना से। वो बस में रोते रोते ही अचानक बेहोष हो गई। वो मेरी बाईं तरफ थी और मैं खिड़की की तरफ बैठा था। बेहोष होते ही वो सीधा मेरी गोद में आकर गिरी। मैंने उसे संभालने की कोषिष की। उसके बड़े बड़े बूब्स मेरी आंखों के सामने थे जो मुझे पागल कर रहे थे। खूबसूरती में तो बस वो एक बला समझिये। नाम था उसका नेहा। मैं नेहा नेहा करके बार बार उसके गाल सहलाता रहा उसके शरीर पर बार बार ऊपर से पेट तक हाथ घुमाता रहा और बीच बीच में नेहा नेहा करता हुआ उसके बूब्स दबाता रहा। शायद गाल पर एक दो थप्पड़ लगाने के बाद उसे होष आ गया था लेकिन वो भी इसका मज़ा ले रही थी। मुझे जैसे ही उसकी आंख थोड़ी सी खुली हुई महसूस हुई मैं चैकन्ना हो गया और संभल गया। फिर वो भी खड़ी हो गई। बस अब क्या था मेरे मन में उसे चोदने का सपना पैदा हो गया और उसे भी मेरे इरादे पता लग गए। हम फोन पर खूब बातें करने लगे और मैंने उससे इज़हार भी कर दिया। एक दिन जब उसकी मां और उसके पापा दोनों उसकी नानी के घर गए हुए थे और उसका भाई जो उससे काफी छोटा था स्कूल गया हुआ था उसने मुझे कुछ नोट्स समझने के लिये बुलाया। मैं भी चला गया। जाते ही डोरबेल बजाये बिना दरवाज़ा खोलने की कोषिष की और दरवाज़ा अंदर से खुला होने के कारण खुल भी गया। उसको ढूंढने की कोषिष की तो वो नहीं मिली और घर खाली थी। आखिर में जब में उसके बेडरूम में पहुंचा तो वो वहां पर अपना सूट पहने हुए बैठी थी लेकिन सलवार उसके हाथ में थी उसकी पीठ मेरी ओर थी और उसे मेरे आने का पता नहीं था। ध्यान से देखा तो वो अपनी सलवार में नाड़ा डाल रही थी लेकिन मैं तो उसकी नंगी टांगों को देख कर पागल हो रहा था। साइड से मुझे उसकी पैंटी साफ दिख रही थी और मैं उसको उतारना चाहता था। थोड़ी देर वैसे ही खड़ा रहा और जब वो नाड़ा डालने के बाद सलवार पहनने लगी तो मैंने दरवाज़े पर खटखट की। वो खड़ी हुई थी बिना सलवार के। जैसे ही पलटी और मुझे देखा उसने टांगों के आगे अपनी सलवार को लगाया और मुझे बाहर भेज दिया मैं बाहर उसका इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर में जब वो आई तो हम एक ही सोफे पर बैठ के पढ़ने लगे। किताब हमने दोनों की टांगो पर आधी आधी रखी थी। मैं पन्ना पलटने के बहाने बार पर उसकी जांघों को छूने लगा और धीरे धीरे थोड़ी देर में बढ़ते बढ़ते उसकी चूत पर भी हाथ लगाने लगा। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था। उसने मेरे इज़हार का जवाब अभी तक नहीं दिया था। थोड़ी देर में मैंने बिना किसी शर्म के उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया। उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा कि ये क्या कर रहे हो? मैंने किताब दूसरी ओर पटक कर उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसे खूब प्यार करने लगा। उसके होंठ खूब चूसे। वो भी पागल हुए जा रही थी। उसने भी मुझे कस के पकड़ रखा था। अब मैं उसके सूट के उपर से ही उसकी चूचियां सहलाने लगा था। वो मदहोष कर देने वाली खूबसूरत अप्सरा थी। चूची एकदम टाइट साइज़ में शायद 38 होगी और कमर 28 तो चूतड़ में गज़ब का उभार था। मैं पागलों की तरह चिपट गया अब उसने अपना सूट खुद उतार दिया। उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी। मैं उसका सूट उतारने लगा तो उसने मेरी मदद करते हुए खुद ही सूट उतार दिया। उसके सूट उतारते ही मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। और उसकी ब्लैक कलर की पैंटी निकाल दी। वो पूरी तरह से नंगी हो गई। लेकिन अपनी चूत को अपने हाथों से छुपाने लगी। मैंने उसके हाथ हटाए तो बोली ‘पहले तुम अपने कपड़े उतारो’ मैंने भी कहा कि अपने आप उतार लो। उसने पहले मेरी टी शर्ट फिर पैंट और उसके बाद मेरा अंडरवियर भी उतार दिया। हम 69 की पोज़ीषन में आ गए। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। क्या गज़ब की चूत थी मैंने उसे चाटना शुरू किया और मेरा 8‘‘लंबा और 2.5 इंच मोटा लंड देखकर जैसे वो तो पागल सी हो गई थी उसने किसी रंडी की तरह मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया था। वो इन बातों से अनजान थी लेकिन षायद बीएफ देख देख के सब कुछ जानती थी। मैनंे 15 मिनट तक उसकी चूत चाटी और उसने मेरा लंड उसके बाद मैंने उसके मूंह में ही अपना षहद टपका दिया और वो भी इतनी देर में तीन बार गीली हो चुकी थी। अब मैं पूरी तरह से जोष में था। मैंने सीधा सीधा अपना लंड उसकी चूत के सामने लगाया और उसकी गीली चूत में डालने लगा। चूत गीली होने की वजह से मेरा काम आसान हो गया था। लेकिन उसकी सील भी टूटी नहीं थी और चूत बहुत टाइट थी। बड़ी मुष्किल से मेरा लंड अंदर गया और जैसे ही गया वो ज़ोर से चिल्लाई। अभी लंड केवल 3 इंच ही घुसा था। मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये और उसके होंठ चूसने लगा। फिर जैसे ही एक धक्का और लगाया लंड आधा घुस चुका था वो दर्द से मरे जा रही थी और कह रही थी कि मुझे माफ करो। प्लीज़ मुझे छोड़ दो। उसकी चूत से खून बहकर सोफे पर गिर चुका था लेकिन मैेंने अपना काम जारी रखा। दो और धक्के लगाए और पूरा लंड अंदर। अब मैं धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा। कुछ ही पलों में वो भी मज़े में आ गई। और खूब चूतड़ उठा उठा कर साथ देने लगी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। कुछ ही देर में वो झड़ गई पर मैंने उसे 25 मिनट तक चोदा और इतनी देर में वो चार बार झड़ी। अलग अलग एंगल से मैंने उसके शरीर के हर हिस्से का पूरा मज़ा लिया। मैं उस दिन जन्नत की सैर कर रहा था। इतनी सुंदर लड़की को मैंने आज तक कभी नहीं चोदा। बाद में मैं उसे रोज़ चोदा करता था। मैनंे उसकी गांड भी कई बार मारी। बहुत मज़ा देती थी साली किसी रंडी की तरह। मेरी स्टोरी आपको कैसी लगी मुझे ज़रूर मेल करें और मेरा हौंसला बढ़ाएं ताकि मैं कुछ और अनुभव भी आपके साथ बांट सकूं। अगर कोई भी हाउसवाइफ, कोई लड़की, कोई भाभी या कोई भी औरत मुझसे रिलेषन बनाने में इच्छुक हो तो मुझे मेरी आईडी पर मेल कर सकती है। आपका और मेरा रिलेषन हम दोनों के बीच ही रहेगा यानि कि पूरी तरह से गुप्त।
मस्तराम जी की कहानिया पढने के लिए बहुत बहुत धन्यबाद और लंडबाद और चूटबाद! हमारा कोशिश हमेशा यही रहेगा की जब जब आप हमारे मस्तरामजी डोट कॉम साईट में आये या साईट के बारे में सोचे ताब ताब आपका लंड खम्बा के तरह खरा हो जाए और आपकी चूट फूआरा के तरह बहने लगे! आपको और किस ढंग का कहानी सुनना या पढना पसंद है, हमें आवश्य बताये! ईमेल करें This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.